अजीब जिन्दगी जी रहे सभी

साथ जो है उसकी खबर नही

रोज बाते होती अजनबी से…जो बैठा कोसो दूर

अपनियत की कमी…रिश्तो मे खल रही

विश्वास जीता उसने..जो रहता कुछ ही दूर

साथ है दिल से…ना है कोई मजबूर

पैसो की औकात…..रिश्तो से बढ गई

बात थी जो मान की….बातों मे रह गई

समझाया जाए किसे…माफ करना भी मुशकिल

अब वक्त ही बतलाएगा ..क्या होता हासिल

मन का मनमुटाव… सादगी को भूल रहा

सुर्खियाँ समाज की .. पन्नो मे खुद गढ रहा

विचार दूरदृष्टि की.. परम्पराओ को ढो रहा

ना जाने कब अन्धभक्ति,के चक्षुओ को खोलता

©Rishabh kumar @myjoopress


हम सफर में रहे.. सफर बन के रहे

सफर का काम….सफर आराम था

सफर की जो बात कही,सफर कारवाँ बना

कुछ बातें हुई ,कुछ यादें जुडी

जो किस्सा बना,फिर वो पल कहाँ

सफर एक सबक, सफर अन्जाम सा

मुस्कानें थामती… कुछ चित्र थे

पाँव थके थे पर.. हम विचित्र थे

दुनियाओं को जोडते,कुछ गमों को भूले हम

आस्था की डुबकी में… खुद से जब मिलें थे हम

कभी ठिठोली ,कभी तो गुस्सा

साथ जो थे हमेशा,उन्हें पहचाना

वक्त जो सुनसान था,खुद से मिलाता

आकाश का बसेरा,जब तारे दिखाता

सफर कमाल था, बेमिसाल सा

अपनो की अहमियत का एहसास दिलाता

कुछ अजनबी चेहरे भी,किस्सो मे जुड गये

अन्जान से थे पर,अपने ही हो गए

सफर की सफलता एक सफल विराम सी

सफर के बातो को किस्सों मे थामती

©Rishabh kumar @myjoopress


“I told my friend that i am sad.”

She said,”Don’t you have a garden of roses,nourish them.”

I smiled.

Didn’t tell I planted them for her.

Didn’t tell the last one rose was in her hairs.

Just to be sure what she cared most.

Just to be sure that no thorns block her vows.

©Rishabh kumar @myjoopress