one day,at a time #rk 127


one day,at a time you decide when i shine. one day,at a time you help me in the rhyme. one day,at a time you leave me undefined. one day,at a time you cry that i mind. Oooops..... No....don't you now dare to make me fool. No....don't you now dare to ruin my rule. No....don't you … Continue reading one day,at a time #rk 127

Could someone #rk 111


Could someone be that one could someone be so nice I'm living in rage with tears could one be my choice Could someone get return could someone get me right I'm waiting to be understood could one say it's right Could someone make me laugh again could someone make me blind I'm ready to live … Continue reading Could someone #rk 111

मैं लिखने लगा #rk 123


मैं लिखने लगा हाँ मैं लिखने लगा पन्नों में सिमटने लगा कुछ शब्दों के सहारे खुद को खुद में ढूँढने लगा v . हाँ मैं लिखने लगा कभी कुछ यादो को कभी किसी की बातों को मन के किसी कोरे पन्नों पर रखने लगा हाँ मैं लिखने लगा जो कहा नहीं किसी से ना ही … Continue reading मैं लिखने लगा #rk 123

दर्द बिक जाता है जमाने मे #rk 125


दर्द बिक जाता है जमाने मे जब खुशियाँ नही दिखती लम्हें भी सदियाे सी लगती है जब किसी का साथ नही होता यूँ तो मुकम्मल हर रात को सुबह ना होती होगी पर क्या करे जनाब ये जिन्दगी है कुछ पल की यादें और मीलों का रास्ता |


straight forwanrd whwn you touch my butt millions in my mind but a music in my gut be my star in the club and the bar cause you're straigjforward and i like it in my heart don't show me that you always know me

सुबह सुबह #rk 121


ना मुकद्दर इश्क के चलते खुद को हम बदनाम कर गए इक तेरी चाहत जो हुई उस चाहत की चाह में खुद को तेरे नाम कर गए #mirakee #poems #poetry #writersnetwork #quotes #quote #writersofinstagram #stories #ttt #quoteoftheday #writersofig #writersofmirakee #wordporn #writing #writer

कहीं.. #rk 120


खुदी से थी आस पर खुदी से नाराज बन्द आँखों में एक नदी सी प्यास राह कागज सी बिन कोई उफान मोड जिन्दगी का अन्धेरे की राख दिल के कोने में बन्द था कहीं एक राज जो किसी को पता नहीं सबेरा भी होगा शामें भी होंगी किस्सों में ही हम ना रह जाएं कहीं … Continue reading कहीं.. #rk 120

अब क्या कहें.. #rk 119


घंटो की बातें मिनटों में सिमट गई यादें हमारी किस्सो में रह गई वक्त बेवक्त मिलने की चाह भी अब ख़ामोशी से कहीं थम गई कोई हिस्सा पुराना रूला देता है कोई रिश्ता हमारा दुआ देता है तू रहे जहाँ रहे मौज से हर अपना कभी तो विदा लेता है तू अपना है,क्यूँ नहीं क्या … Continue reading अब क्या कहें.. #rk 119

यूँ ही… #rk 118


लोग समझते नहीं इसलिए तो समझाना पडता है रो-रोकर ही सही हर जख्म दिखाना पडता है यूँ ही किस्से बदनामियों के मशहूर नहीं होते जिन्दगी जीनी है तो जीने के लिए लड जाना पडता है ताउम्र इस दौड मे खुद को भूलाना पडता है हर किसी की खुशी की खातिर सपनों को मिटाना पडता है … Continue reading यूँ ही… #rk 118

दर्द कहो या… #rk 117


दर्द कहो कहर कहो या आफत घर की हिंसा नफरत की जंग या हिमाकत आपसी रंजिश दिलों की साजिश या कडवाहट जलजला ला देती है अपनापन खा जाती है दुनिया को उजाड कर सब कुछ मिटा देती है गैर कहो अपना कहो या घातक जुबाँ बनो जुदा रहो या नाटक गलती कोई इंसाफ झूठा या … Continue reading दर्द कहो या… #rk 117

तुझे है पता #rk 116


तू सोचता है..खुद को रोकता है.. भरोसा है खुद पर ...फिर भी टोकता है जंग जारी है ...सारी तैयारी है घर पर बैठकर क्यूँ ..खुद को कोसता है उम्मीद है तू ...सवेरा है खुद में दियों की रोशनी सा ही सही... कुछ तो भभकता है इरादा करता है... थोडा सा लडता है... नाम झूठा बता … Continue reading तुझे है पता #rk 116

कभी कभी मन #rk 115


कुछ समझना चाहता है कुछ समझाना चाहता है कुछ सुनना बडे ध्यान से कुछ सुनाना चाहता है पर हम ही इस मन को भुलाना चाहते हैं कुछ यादें अपने दिल में दफनाना चाहते हैं इस चकाचौंध की दुनिया में कभी कभी अकेला रहकर अपनों से ही अजनबी बन जाना चाहते हैं m

तू मुझसी नहीं मुझसे जुदा सी है #rk 113


तू मुझसी नहीं मुझसे जुदा सी है तू मेरी नहीं मुझसे कहीं बढ़ कर है फिर भी बातें तेरी मुझसे जुदा नहीं तू लफ्जों में बन्द शामें दुआ सी है तू मुझसी नहीं मुझसे जुदा सी है मेरी बातें तो सुन क्यों मुझसे खफा सी है तेरी बातें तो हर किसी से जुदा सी है … Continue reading तू मुझसी नहीं मुझसे जुदा सी है #rk 113

सच कहूँ #rk 112


ना कोई पास है ,ना कोई खास है पर ना जाने हमको किसका इन्तजार है सच कहूँ हम समझते नही कुछ अल्फाज़ अनकहे पर पर पढने की कोशिश करते है दिल के कुछ दर्द छिपे वक्त बीतता है घाव छिपता है रह जाते हम बँधे कहीं याद रहता है हँसना हँसाना भूलते फिर भी दर्द … Continue reading सच कहूँ #rk 112