मिलते हैं #rk


सुनो, कैसे हो!! अच्छे हो ना?
कई दिन हुए मिले, भूले तो नही!
खैर होता है, होता है अक्सर ऐसा।
नये चेहरे सामने आने पर,
कुछ चेहरे अक्सर धुंधले पडने लग जाते हैं।
फिर भी, कुछ रिश्ते होते हैं,
कुछ रिश्ते होते हैं, जो ना तो कभी दिल से दूर होते हैं,
ना ही उतने करीब ही आ पाते हैं।
हमारी कहानी भी ऐसी ही रही,
तुम्हें कोई तुम्हारी बातें सुनने वाला चाहिए था,
और शायद मुझे भी।
हम सारी बातें एक दूसरे को बता दिया करते,
शायद इसीलिए अब बात करने को कुछ बचा ही नहीं।
सुनो, याद तो आती है तुम्हारी, पर मैं कहूँगा नहीं।
इसलिए नहीं कि तुम्हें अच्छा लगेगा,
बल्कि इसलिए कि अब तुम सुनना ही नहीं चाहते।
शायद अब मेरी बातें उतनी मजाकिया नहीं रहीं।
खुश हूँ, परेशान मत होना, मिलते रहेंगे।
जैसे थे, वैसे ही रहेंगे, तुम्हारे लिए।
चलो फिर एक बार, फिर से शुरू करते हैं।
खैर छोडो, अब वक्त किसके पास है,
सब व्यस्त हैं, अच्छी बात है, है ना!
सुनो, अच्छा कुछ नहीं, मिलते हैं, ध्यान रखना अपना।

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