अपने लिए भी समय निकालो


अपने लिए भी समय निकालो
क्यूँ गैरों के लिए मरते हो?
जिन्दगी मिली है नसीब से,
क्यूँ बस गुज़र करते हो?
जीना चाहते हो, जीते क्यूँ नहीं?
पंख हैं तुम्हारे, उडते क्यूँ नहीं?
कुछ साथ देंगे ही, जैसे कि आज हैं।
फिर बता क्यूँ भला, तू यूँ उदास है?
क्या नाम नहीं अब तक तेरा?
घबराता क्यूँ है?
चील के बच्चों को उडना भला,
सिखाता कभी कौन है?
समय तेरा कीमती, खुद की पहचान कर।
साथ देगी हर दुआ, खुद पर विश्वास कर।
ना कर शर्म कोई, सब कर्म का खेल है।
सोचता रहेगा बस अगर, शरीर भी एक जेल है।
जानता है सब तो तू, थोडा मुस्कुरा भी ले।
जी ले अपनी जिन्दगी, समय थोडा निकाल के।

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