Strange but obvious


It's strange! When we had to know, we didn't. When we had to try, we excused. When we had to say, we mocked. So why all this moan! Isn't it right way! God is to guide way. Isn't it some ray! Creating His light ray. Back to the room, and being that baboon with bananas … Continue reading Strange but obvious

मैं तेरा, बिछडा एक ख़्वाब हूँ।


Here is my thoughts during this quarantine sometimes, when I search deep sometimes, something within. मैं तेरा बिछडा एक ख़्वाब हूँ। सुना है, आजकल, तू रहता है शून्य। सुना है, आजकल, तू रहता है शून्य। तेरे साथ लेके तुझे तुझसे ही पार करने को तैयार हूँ। मैं तेरा, बिछडा एक ख़्वाब हूँ। तू ना चाहे … Continue reading मैं तेरा, बिछडा एक ख़्वाब हूँ।

जब बाते करनी हो


जब बाते करनी हो, बता देना। जब मिलना हो, दुआ करना। कुछ किस्से हो तो, सुना देना। कुछ किस्से हमारे भी, सुन लेना। कुछ किस्से, कहीं छूटे हैं। उन हिस्सों को, जी ले तू। कुछ पल, मिले हैं अभी। इन पलों में, रह ले तू। कुछ इरादे कभी किए थे तूने। उन इरादों को हकीकत … Continue reading जब बाते करनी हो

Quarantine Poem


Well in this situation of Quarantines, we all have all leisure that we ever wanted, but we feel like trapped, don't we! So this quarantine poem goes like this: Well, we all do know, it's really well tight. Nothing much to do, full days and night. Days deviating, and nights with heights. With hope that … Continue reading Quarantine Poem

Wanted to touch


wanted to touch herso touched her soulwe don't cross fingerswe just trust each otherlearning from her,not my sidea friend of silence without much voicecare might she notnot a big dealhad wished for a friendwith a shy zeal.

कैद कर लो


कैद लो तुम मुझे इन गलियों के घरौंदों में। कैद कर लो कि मुझमें, अब भी जीने की चाह है।

अब क्या कहें


अब क्या कहें, अब क्या कहें, कि हम कब से यूँ बेसबर से बैठे हैं। करनी है बातें कई से, करनी है, बातें कई से, पर हम बेसबब ही बैठे हैं। है जानता मेरा खुदा, मेरी मर्जी क्या, और क्या रज़ा। कुछ लम्हें अब, बेसबर सही। जिन्दा तो हैं, बेसबब सही। रहेगी उम्मीदें, तो मिलेंगे … Continue reading अब क्या कहें

दोस्ती : शायरी


कुछ लोगों का काम है मिलना बेमतलब से मिल लेते हैं। क्या करें, मजबूरी होगी शायद, अपना जो मान लेते हैं। कहना आसान होता, तो क्या से क्या हो जाता। मुश्किल है, तभी तो एहसास जिन्दा हैं। पसन्द आए तो गुलाब समझना नापसन्द तो, समझना कोई भूल रखना ही है तो, यादों मे रखना किस्से … Continue reading दोस्ती : शायरी

भूलना आस़ान है क्या


क्यूँ चाहते हो भूल जाना हमें? क्यूँ,मिलने की अब दुआ भी नहीं करते? क्या यहीं तक था साथ हमारा? क्या, इतनी ही थी वफा हमारी? उफ, हमारी? अब इतनी तो चाहत नहीं। क्या कहा? जरूरत के थे हम साथी! शायद सच ही है, कि ना जाने क्यूँ हम, पागल से थे। जानते थे, बस एक … Continue reading भूलना आस़ान है क्या

सही कहते हो


हाँ शायद, रोज बातें करने से किसी की आदत लग जाए, पर रोज बातें करना, जरूरी तो नहीं। हाँ शायद, किसी का साथ होने से दिल ये बहल जाए, पर दिल को लगाना, जरूरी तो नहीं। हो सकता है, कि कहीं, कोई भी ना बात हो, फिर भी उन्हें, हम याद हों, अब ये तो … Continue reading सही कहते हो

निगाहें


निगाहें शक करती हैं, हाँ, ये शक पैदा करती हैं। चाहतें झूठी हों फिर भी, हाँ, ये चाहते पैदा करती हैं। किसी के हालातो को भाँपना , बस यही हिमाकत है इसकी। किसी आँखो को पढ पाना बस यही चाहत है इसकी। कुछ छिपाता है, कुछ शायद समझा भी पाता है। कुछ कहे बिना भी … Continue reading निगाहें

खुद से वादा करो


खुद से वादा करो कि कभी गम में ना जाओगे। स्थिति,हो जितनी विकट, नहीं घबराओगे। हाँ माना, चुनौतियाँ आएंगी कठिन से कठिन, माना, चुनौतियाँ आएंगी कठिन से कठिन, धीरे-धीरे ही सही, मुस्कुराते हुए पार कर जाओगे। लडना जरूरी है, है तुमने जाना। औरों का बनना सहारा, तुमने माना। साहस, स्नेह, दया और सहयोग। वादा करो … Continue reading खुद से वादा करो

सहयोग करते रहिए


सहयोग करते रहिए हाँ आप से ही कह रहा हूँ, सहयोग करते रहिए। हाँ शायद, आप जितना अच्छा नहीं, पर खुद से, कभी, कम न आँकिये हमें। हाँ, सीख रहा हूँ मैं अभी, इसलिए कहता हूँ, दूसरों की भी कदर रखिए दिल में। कुछ कहते हैं, बातें मनचली, कुछ खुद को कहीं छिपा भी लेते … Continue reading सहयोग करते रहिए