जिन्दगी का कुछ यूँ है फलसफा,


ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी का कुछ यूँ ही है फलसफा,
पल भर मासा, पल भर तोला।

कुछ पल को है आजाद ये रिश्तें,
फिर हम कौन, फिर तुम कहाँ।

कुछ याद आएंगे, कुछ भूल जाएंगे,
कई चेहरे जिन्दगी में,
पीछे कहीं छूट जाएंगे।

कभी पल भर की, मीठी सी मुस्कान में,
किसी मोड पर, बिछडों से मुलाकात में,
कुछ पलों को दोबारा, हम जी आएंगे।

ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी का कुछ यूँ ही है फलसफा।

कभी इन बन्धनों, कोरे एहसासों की खातिर,
खुद को भूल, दूसरों की खुशी,
हम हमेशा पहले चाहेंगे।

कभी अनजान बनकर, बिना कुछ बोले ही,
इंसानियत की आवाज़ बनकर मदद,
हम करते ही जाएंगे।

ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी का कुछ यूँ ही है फलसफा।

पर क्या ये, गलत होगा अगर हम,
उन पलों को दिल से ना लगाएं।

वादा, इरादा, रहा हो कभी किसी का, कैसा भी
बस हम निष्कपट, निस्वार्थ आगे आएंगे।

ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी का कुछ यूँ ही है फलसफा।

शायद ये गलत है, या शायद सही।
ज़िन्दगी,
कहती तो बहुत है, पर बताती नहीं।

कुछ पल विराम से,
कभी थोडे एहतियात से,
दिखाती है, सुनाती है।

कभी है ये थपेडो सी,
कुछ खाली पड़ी जेबों सी,
सताती है, एहसास कराती है।

ज़िन्दगी,
क्या है इसका फलसफा।

कहाँ है इसे पहुँचाना हमें,
क्या आपको है पता!?

-Rishabh kumar
©rishabh_myjoopress



Featured image by Designecologist
Thank you all for your support.

🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱

You can also join myjoopress through Facebook Twitter Instagram and also on YouTube now.

5 Comments

  1. शायद ये गलत है, या शायद सही।
    ज़िन्दगी,
    कहती तो बहुत है, पर बताती नहीं।
    Wow, Rishabh these lines, so deep actually whole poem is, very beautifully written 😊😊

    Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.