दोस्ती : शायरी


सबके साथ ना खेलो,
खिलाडी कई हैं मैदान में।
एक दोस्त बनाओ सच्चा,
जो पहचाने तुम्हें हजार में।


कुछ अजनबी अपनों से है
कुछ अपनें अजनबी से हो गए
एक वक्त था, बिन कहे सब जानते थे
अब तो मिलकर भी,
बस गुफ्तगू से हो गए


तुम वो हो, तुम वो नहीं
तुम हो साथ, पर साथी नहीं
तुमसे है विश्वास, हमें खुद पर
तुम हो हम में, तुम में हम नहीं


-Rishabh kumar

©rishabh_myjoopress



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6 thoughts on “दोस्ती : शायरी

  1. कुछ अजनबी अपनों से है
    कुछ अपनें अजनबी से हो गए
    एक वक्त था, बिन कहे सब जानते थे
    अब तो मिलकर भी,
    बस गुफ्तगू से हो गए।
    बेहतरीन पंक्तियाँ।👌👌

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