लिखना तो मैं चाहता हूँ
पर कैसे कोई नई बात लिखूँ
साथ लिखूँ, आवाज़ लिखूँ
बिखरा बिसरा ख़्वाब लिखूँ
आम हूँ मैं, क्या खास लिखूँ
जो गुजरे वही अल्फ़ाज लिखूँ

शब्दों के किसी संगम से
दिल की अपनी बात लिखूँ
याद लिखूँ, एहसास लिखूँ
सिमटा सा कोई राज लिखूँ
आम हूँ मैं, क्या खास लिखूँ
जो परखू वही हालात लिखूँ

कौन है साथी, कौन पराया
जीवन का कोई साज़ लिखूँ
शाम लिखूँ, जज़्बात लिखूँ
नफरत से पनपा प्यार लिखूँ
आम हूँ मैं, क्या खास लिखूँ
जो दुख है वही मै जाम लिखूँ

काम लिखूँ, आराम लिखूँ
नाम की हर तलाश लिखूँ
शाख लिखूँ, कोई राह लिखूँ
सफर की एक-एक साँस लिखूँ
आम हूँ मैं, क्या खास लिखूँ
जो सीखा वही हर बार लिखूँ

अब और कहिये जनाब
क्या लिखूँ, क्या लिखूँ, क्या लिखूँ
अब मैं क्या लिखूँ।

©rishabh_myjoopress
-rishabh kumar



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