खुद को आजमाइये
चले आइये
मोह को भूल
ना शर्माइये
क्यूँ है रिश्ते, हुए बन्धनों से
इतना भी ज्यादा ना घबराइये
खुद को जरा और आजमाइये

गलत क्या, सही क्या
बचा क्या किसी का दुनिया में।
दो पल हम साथ है,
खुलकर जीना क्या कोई बुरी बात है!
एहसासों को जिन्दा रखकर
मन को पूरे मन से मना लाइये
खुद को जरा और आजमाइये

-rishabh kumar

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