हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं


ज्यादा कुछ नहीं हम बातें तो कर सकते हैं
जब समझ आए ना हालात जज्बात बन सकते है
दिला सकते हैं हौसला, विश्वास खुदपे रखने का
हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं

लिख सकते हैं पन्नों पर जो कुछ कभी हो कहना
खामोश रह कर भी हम साथ दे सकते हैं
पिला सकते हैं चाय, समोसे भी खिला सकते हैं
हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं

वक्त आने पर अगर ना दे साथ कोई तुम्हारा
कुछ बातें अनसुनी अनदेखी भी कर सकते हैं
बन सकते हैं साथ, दिल से, भले जेब खाली
हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं

ना कम है, ना होगा, किनारा इस वफ़ा का
हर रजा में तेरी हम तेरी दुआ बन सकते हैं
हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं
हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं

3 thoughts on “हैं दोस्त, तो दोस्ती का एहसास बन सकते हैं

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